किशोर पोषण और स्वच्छता को आमतौर पर अभियानों के ज़रिए संभाला जाता है, यानी वे एक आयोजन और दूसरे आयोजन के बीच ग़ायब हो जाते हैं।
कार्यक्रम ने सरकार से जुड़ी सलोनी योजना को लागू करने वाले छप्पन स्कूलों के साथ काम किया, साथ ही पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गाँव-स्तरीय काम भी चला। एक सौ दस शिक्षकों को इस योजना पर प्रशिक्षित किया गया और नियमित विषयगत बैठकें आयोजित करने में सहयोग दिया गया।
छप्पनों स्कूलों में, 7,543 किशोरों तक स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण की जानकारी पहुँचाई गई। यह गतिविधि है। यह अभी तक कुछ नहीं बताता कि कोई संस्था बदली या नहीं।
छप्पन में से चौदह स्कूलों ने ख़ुद ही सलोनी बैठकें आयोजित करनी शुरू कर दी थीं और ब्लॉक के प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मासिक रिपोर्ट भेजनी शुरू कर दी थी।
इन बैठकों के लिए किसी ने प्रेरित नहीं किया। शिक्षकों ने इस चक्र को - बुलाना, चर्चा करना, रिपोर्ट करना - अपनी ही संस्थागत भूमिका में समा लिया था, और स्वास्थ्य सुविधा को वह काग़ज़ी काम मिल रहा था जो इसे असली बनाता था।
DEHAT ने शिक्षक क्षमता-निर्माण, उपकरणों, शुरुआती बैठकों और स्कूलों तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच जुड़ाव को सुगम बनाया। शिक्षकों और स्कूल समुदायों ने इसे आगे बढ़ाया। सार्वजनिक-स्वास्थ्य सुविधाओं को रिपोर्टें मिलीं, और आगे क्या होगा, इसकी ज़िम्मेदारी उन्हीं की रही।
यहाँ काम का पैमाना यह नहीं है कि कितने किशोर शामिल हुए। यह है कि बैठक किसने बुलाई और रिकॉर्ड किसने रखा। जब यह बदलता है, तो किशोर स्वास्थ्य को एक मौसम के बजाय एक नियमित ठिकाना मिल जाता है।
पैमाना यह नहीं है कि कितने लोग शामिल हुए। पैमाना यह है कि बैठक किसने बुलाई।
उस व्यक्ति को प्रशिक्षित करें जो टिका रहेगा
एक प्रशिक्षित शिक्षक हर परियोजना-चक्र से ज़्यादा टिकता है। चौदह स्कूल आगे बढ़ते रहे; जिस सवाल में निवेश करना ज़रूरी है, वह यह है कि बाक़ी बयालीस को किस चीज़ की ज़रूरत थी।