परिवर्तन की कहानियाँ
एक व्यक्ति से शुरुआत करें।
DEHAT के अपने केस रिकॉर्ड से लिखी गई। जहाँ रिकॉर्ड में वयस्कों के नाम दर्ज हैं, वहाँ वही नाम दिए गए हैं; बच्चों के नाम बदल दिए गए हैं। किसी को चुनें और उसका जीवन पढ़ें।
फ़िल्टर
117 कहानियाँ
सोलह लड़कियाँ
स्कूल से साइकिल से घर लौटते हुए
वे स्कूल से साइकिल पर घर लौट रही थीं जब उन्होंने एक अजनबी के ट्रक के भीतर से एक बच्चे के रोने की आवाज़ सुनी। उनमें से कोई भी पंद्रह वर्ष से बड़ी नहीं थी।
बाल पंचायत
एक ग्रामीण प्राथमिक विद्यालय
न कोई क्रिकेट बैट था, न गेंद, कुछ भी नहीं। यह वैसी कमी है जिसे बड़े देखना बंद कर देते हैं। बच्चों ने नहीं छोड़ा।
अरुण
सूचना मंत्री, बारह वर्ष की आयु
बारह साल के एक बच्चे को काम पर एक बाज़ार वाले क़स्बे में भेज दिया गया था। इस बात को नोटिस करने वाला एक और बारह साल का बच्चा था।
शिव
निर्वाचित प्रधानमंत्री, ग्यारह वर्ष की आयु
ग्यारह साल का, अभी-अभी चुना गया, और बैठक शुरू तक नहीं कर पाता था। छह महीने बाद वही बैठकें चला रहा था।
रूबी
शिक्षार्थी, और उसकी शिक्षिका
एक शिक्षिका हर सुबह उसके घर के सामने से गुज़रती थी। एक दिन उसकी माँ ने उसे भीतर बुला लिया।
रीना
बाल पंचायत सदस्य
उसके परिवार का मन बदलने वाली कोई दलील नहीं थी। यह देखना था कि वह और बाक़ी बच्चे पहले ही क्या कर चुके थे।
किरण
शिक्षार्थी, तेरह वर्ष की आयु
तेरह साल की, स्कूल से बाहर रह चुकी, फिर से कक्षा में लौट आई, और वहाँ चुप। उसकी शिक्षिका ने ज़ोर नहीं डाला।
पचास शिक्षिकाएँ
बालिका अधिकार कार्यकर्ता, जमुनहा
कोई लड़की आपको बताएगी कि उसकी शादी की बात चल रही है। वह किसी अजनबी को नहीं बताएगी।
अभिभावक समितियाँ
बालिका शिक्षा अधिकार समितियाँ
यही विफलता है जिसने तरीक़ा बदल दिया। यह वह कहानी है जिसे DEHAT छिपाता नहीं है।
सड़सठ गाँव
स्वाध्याय लर्निंग सेंटर
जो बच्चा पहले ही स्कूल छोड़ चुका है, उसके लिए कक्षा में बैठना मुश्किल हिस्सा नहीं है। वापस उसमें क़दम रखना है।
जगदीशपुर
विद्यालय प्रबंधन समिति
ऐसा लगभग कभी नहीं होता। यह इसलिए हुआ क्योंकि जो समिति स्कूल चलाने के लिए बनी थी, उसने स्कूल चलाना शुरू कर दिया।
बीस लड़कियाँ
जंगल के गाँवों से बहराइच शहर तक
यह ढलान साक्षरता की नहीं है। यह वह साल है जब कोई लड़की चौदह की होती है और नज़दीकी स्कूल बहुत दूर हो जाता है।
बारह शिक्षक
सरकारी प्राथमिक विद्यालय
कोई नई इमारत नहीं, कोई नया बजट नहीं। फ़र्श, दीवारें और गलियारा पहले से ही मौजूद थे।
संरक्षण बूथ
दरगाह मेला, बहराइच
एक टेंट, एक मेज़ और एक नंबर जो सबको बता दिया गया था। यही पूरा हस्तक्षेप था।
सीमा मंच
भारत और नेपाल, मिलकर काम
बच्चे गाँवों के बीच की दरारों में ग़ायब नहीं होते। वे संस्थाओं के बीच की दरारों में ग़ायब होते हैं।
बहत्तर महिलाएँ
एक स्वयं सहायता समूह, और एक राशन की दुकान
वे बचत करने के लिए साथ आई थीं। वे एक सार्वजनिक सेवा को जवाबदेह बनाने के लिए साथ बनी रहीं।
आठ वनग्राम समितियाँ
वनग्राम आज़ादी संघर्ष समितियाँ
वन अधिकार अधिनियम ने एक रास्ता बनाया। उसका इस्तेमाल करने का मतलब था एक क़ानून पढ़ना, एक समिति बनाना, और ऐसे काग़ज़ात जुटाना जो किसी के पास नहीं थे।
पाँच ग्राम पंचायतें
सूचना के अधिकार का उपयोग करते निवासी
सूचना का अधिकार आमतौर पर एक लोकतांत्रिक सिद्धांत के रूप में बताया जाता है। पाँच पंचायतों में यह वह ज़मीन पाने का तरीक़ा था जो पहले ही आवंटित हो चुकी थी।
एक सौ सैंतालीस आशा
मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता
आशा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का आख़िरी छोर है। उसकी काम की परिस्थितियाँ एक स्वास्थ्य मुद्दा हैं, कोई एचआर मुद्दा नहीं।
दस गाँव
समितियाँ और बाल पंचायतें
सीमा के पास बाल संरक्षण चौकसी के भरोसे नहीं चल सकता। इसे एक मंच, एक रजिस्टर, और अधिकारियों तक पहुँचने का एक जाना-पहचाना रास्ता चाहिए।
पाँच हज़ार मज़दूर
दस ग्राम पंचायतें, एक ही द्वार
जब स्टेट फ़ार्म्स कॉर्पोरेशन ने पाँचवीं को बंद करने का फ़ैसला किया, तो महिला मंच ने एक गठबंधन बनाया और इसके ख़िलाफ़ छह हफ़्ते तर्क दिए
द्वारिका प्रसाद
दिहाड़ी मज़दूर, फिर किसान
चार हज़ार वर्ग फ़ीट, पारंपरिक तरीक़ों से खेती की गई, और जब काम मिलता तो पचास रुपये रोज़।
गीता देवी
करिकोट मैया आजीविका अधिकार संगठन
कोई बड़ी फ़सल नहीं। दो अलग-अलग घड़ियों पर, दो फ़सलें, ऐसी ज़मीन से जिसे ज़्यादातर लोग योजना बनाने लायक़ भी नहीं मानेंगे।
राधेश्याम
गंगा आजीविका अधिकार संगठन
एक छोटे किसान के लिए, कोई प्रयोग जो नाकाम हो जाए, वह महज़ एक आँकड़ा नहीं होता। वह एक पूरा मौसम होता है। इसलिए उन्होंने इस प्रयोग को छोटा रखा।
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