बाल सुरक्षा को बच्चों तक सिर्फ़ 'सावधान रहो' के निर्देश के रूप में नहीं पहुँचाया जा सकता।
#SaveKidsLives अभियान ने एक जूनियर हाई स्कूल और पास की ट्रक-पार्किंग जगह में, एक ही संदेश के लिए दो अलग-अलग श्रोता-समूह बनाने के बजाय, एक साझा सार्वजनिक संवाद रचा।
बच्चों ने किसी श्रोता की तरह हिस्सा नहीं लिया। चित्रकारी और पोस्टर बनाने ने उन्हें यह दिखाने का मौक़ा दिया कि उनकी जगह से सुरक्षा कैसी दिखती है। नाटिकाओं, कठपुतली और प्रश्नोत्तरी ने तकनीकी सामग्री को ऐसी चीज़ में बदल दिया जिस पर साथियों और बड़ों के साथ बहस की जा सके। एक हस्ताक्षर अभियान ने इस चिंता को निजी डर से बदलकर एक सामूहिक रुख़ बना दिया।
अभिभावकों ने वह जानकारी दी जो वे बच्चों के रोज़ के रास्तों और परिवारों द्वारा आवागमन को लेकर लिए जाने वाले फ़ैसलों के बारे में जानते थे। ट्रक चालकों ने पार्किंग यार्ड में हिस्सा लिया, जहाँ सुरक्षा संदेश पेशेवर ड्राइविंग की हक़ीक़तों से रूबरू हो सके।
लगभग 340 बच्चों और 200 ट्रक चालकों ने हिस्सा लिया।
DEHAT ने गतिविधियों को सुगम बनाया और समूहों को एक ही प्रक्रिया में लाया। स्कूलों, बच्चों, परिवारों और चालकों ने ही असली सामग्री दी। भूमिकाओं का यह बँटवारा ही तर्क है: सुरक्षा इस पर निर्भर करती है कि बड़े लोग सार्वजनिक स्थान को कैसे बनाते और उपयोग करते हैं, चालक कितनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं, और क्या बच्चों के अनुभव को सुना भी जाता है या नहीं।
नेतृत्व की कहानी के रूप में यह दिखाती है कि बच्चे किसी ऐसे विषय पर सार्वजनिक संवाद को आकार दे रहे हैं जो उन्हें सीधे प्रभावित करता है। संरक्षण की कहानी के रूप में यह दिखाती है कि रोकथाम को बाल-संरक्षण संस्थाओं से आगे बढ़कर सड़कों, परिवहन और कार्यस्थलों तक क्यों पहुँचना चाहिए।
रोकथाम को बाल-संरक्षण संस्थाओं की सीमा से आगे बढ़कर रोज़मर्रा की व्यवस्थाओं तक पहुँचना होगा।
दूसरे पक्ष को भी कमरे में लाएँ
जिन अभियानों में उन लोगों को भी शामिल किया जाता है जिनके व्यवहार पर सवाल है, उनकी लागत उन अभियानों जितनी ही होती है जो ऐसा नहीं करते।